Cheque Bounce Rules:भारत में व्यापार और आम लेनदेन में चेक का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। चेक को एक भरोसेमंद भुगतान साधन माना जाता है, लेकिन जब चेक बाउंस होता है तो इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि कानूनी परेशानी और मानसिक तनाव भी बढ़ता है। चेक बाउंस से जुड़े मामलों को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट और RBI की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टता सामने आई है, जिससे आम नागरिकों और व्यापारियों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
चेक बाउंस क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति या संस्था भुगतान के लिए चेक जारी करती है और बैंक में जमा करने पर वह चेक अस्वीकृत (Dishonour) हो जाता है, तो इसे चेक बाउंस कहा जाता है। इसके मुख्य कारण हो सकते हैं – खाते में पर्याप्त राशि न होना, खाता बंद होना, हस्ताक्षर में अंतर या चेक पर गलत जानकारी भरना। बढ़ते व्यापारिक लेनदेन के साथ चेक बाउंस के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।
चेक बाउंस से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या
अक्सर पीड़ित व्यक्ति को यह स्पष्ट नहीं होता कि चेक बाउंस का मामला किस अदालत में दर्ज किया जाए। इसी भ्रम के कारण कई लोग गलत जगह केस दर्ज कर देते हैं या फिर कानूनी प्रक्रिया से पूरी तरह दूर हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला इसी भ्रम को खत्म करता है और अदालत की अधिकारिकता को स्पष्ट करता है।
RBI का नया नियम क्या है?
RBI के नए नियम के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का चेक बाउंस होता है तो बैंक को 24 घंटे के अंदर इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा। यह सूचना SMS या ईमेल के माध्यम से दी जाएगी। इससे चेक जारी करने वाला और प्राप्तकर्ता दोनों समय रहते जरूरी कदम उठा सकेंगे और अनावश्यक विवादों से बचा जा सकेगा।
लगातार चेक बाउंस होने पर अकाउंट हो सकता है फ्रीज
नियमों के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति का चेक लगातार तीन बार बाउंस होता है, तो बैंक उसके खाते को अस्थायी रूप से फ्रीज कर सकता है। यह कदम भुगतान प्रणाली में अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि लोग चेक जारी करने से पहले जिम्मेदारी से व्यवहार करें।
चेक बाउंस से बचने के आसान तरीके
चेक बाउंस से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि खाते में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखा जाए। इसके अलावा चेक पर तारीख, राशि और प्राप्तकर्ता का नाम साफ और सही तरीके से भरा जाए। चेक जारी करने से पहले हस्ताक्षर भी जरूर मिलान कर लें। थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी कानूनी परेशानी से बचा सकती है।
चेक बाउंस पर सजा का प्रावधान
चेक बाउंस होना कानूनन अपराध है। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होने पर दोषी व्यक्ति को सजा दी जा सकती है। इसमें 2 साल तक की जेल, चेक की राशि के बराबर या उससे दोगुना जुर्माना, कोर्ट फीस और कानूनी खर्च शामिल हो सकता है। इसके अलावा कुछ मामलों में ₹100 से ₹750 तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
RBI और सुप्रीम कोर्ट के ये नए नियम और फैसले चेक बाउंस मामलों में पारदर्शिता और अनुशासन लाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। इससे न केवल पीड़ितों को समय पर जानकारी मिलेगी, बल्कि गलत तरीके से चेक जारी करने वालों पर भी सख्ती होगी। सही जानकारी और सावधानी अपनाकर चेक बाउंस जैसी समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है।









