EPFO scheme update 2026:भारत में प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा हमेशा एक बड़ी चिंता रही है। जहां सरकारी कर्मचारियों को पेंशन की सुविधा मिलती है, वहीं निजी क्षेत्र के कर्मचारी अक्सर भविष्य को लेकर असमंजस में रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपनी पेंशन योजनाओं में लगातार सुधार कर रहा है। साल 2026 में EPFO पेंशन स्कीम से जुड़े कुछ बड़े बदलाव सामने आ सकते हैं, जिनसे लाखों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
EPFO पेंशन योजना क्या है
EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन भारत की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा संस्था है। इसके तहत दो प्रमुख योजनाएं चलाई जाती हैं—EPF (Employees’ Provident Fund) और EPS (Employees’ Pension Scheme)। EPF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से हर महीने योगदान किया जाता है, जबकि EPS के माध्यम से कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन मिलती है।
वर्तमान नियमों के अनुसार, कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत नियोक्ता EPF में जमा करता है, जिसमें से 8.33 प्रतिशत हिस्सा EPS यानी पेंशन योजना में जाता है। 58 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद कर्मचारी पेंशन के लिए आवेदन कर सकता है।
मौजूदा पेंशन से जुड़ी समस्याएं
अभी EPS के तहत न्यूनतम पेंशन केवल 1000 रुपये प्रति माह है, जो आज की महंगाई को देखते हुए काफी कम मानी जाती है। बढ़ते स्वास्थ्य खर्च, रोजमर्रा की जरूरतें और महंगाई के कारण पेंशनधारकों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से लंबे समय से पेंशन राशि बढ़ाने की मांग की जा रही है।
EPFO स्कीम अपडेट 2026 में क्या बदलाव संभव
साल 2026 में EPFO पेंशन योजना में कुछ अहम सुधार किए जा सकते हैं। सबसे बड़ा बदलाव न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाने से जुड़ा हो सकता है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 7500 रुपये प्रति माह किया जाए। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो इससे लाखों पेंशनधारकों को बड़ी राहत मिलेगी।
इसके अलावा, पेंशन की गणना के फॉर्मूले में बदलाव की भी चर्चा है। अभी पेंशन की गणना अंतिम 60 महीनों की औसत सैलरी के आधार पर होती है। प्रस्ताव है कि पूरे सेवा काल की औसत सैलरी को आधार बनाया जाए, जिससे कर्मचारियों को ज्यादा पेंशन मिल सके। साथ ही पेंशन पर महंगाई भत्ता (DA) जोड़ने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
ई-श्रम पोर्टल और सामाजिक सुरक्षा
जहां EPFO संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए है, वहीं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सरकार ने ई-श्रम पोर्टल शुरू किया है। यह पोर्टल दिहाड़ी मजदूरों, निर्माण श्रमिकों, घरेलू कामगारों, रिक्शा चालकों और छोटे काम करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का काम करता है।
ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने से श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार होता है, जिससे उन्हें भविष्य में पेंशन, बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है।
डिजिटल सिस्टम से बढ़ी सुविधा
EPFO और ई-श्रम दोनों योजनाओं को डिजिटल बनाने से कर्मचारियों और श्रमिकों को काफी सुविधा मिली है। अब EPFO पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए पासबुक देखना, क्लेम करना, स्टेटस चेक करना और KYC अपडेट करना आसान हो गया है। UAN नंबर के जरिए सभी जानकारी एक जगह उपलब्ध रहती है और पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होता है।
भविष्य के लिए क्यों जरूरी हैं ये योजनाएं
आज के समय में नौकरी की स्थिरता कम होती जा रही है। ऐसे में EPFO और ई-श्रम जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भविष्य का मजबूत सहारा बनती हैं। नियमित पेंशन, बीमा और वित्तीय सहायता लोगों को बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करती हैं। यही कारण है कि सरकार इन योजनाओं को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। योजनाओं से जुड़े अंतिम नियम और लाभ संबंधित सरकारी अधिसूचना पर निर्भर करेंगे। सही और अपडेट जानकारी के लिए EPFO या श्रम मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट अवश्य देखें।









